दिल्ली के अस्पतालों में करोड़ों के उपकरण बेकार, हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव से मांगी रिपोर्ट
दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट में 50-60 करोड़ रुपये के उपकरण और जीटीबी अस्पताल में 400 वेंटिलेटर बिना इस्तेमाल पड़े हैं।

नई दिल्ली। दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली सरकार के अस्पतालों में करोड़ों रुपये के चिकित्सा उपकरण बेकार पड़े रहने पर गंभीर चिंता जताई है। न्यायमूर्ति प्रतिभा एम. सिंह और न्यायमूर्ति मनमीत पी.एस. अरोड़ा की पीठ ने इस मामले में स्वास्थ्य सचिव से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
अदालत ने कहा कि दिल्ली स्टेट कैंसर इंस्टीट्यूट और जीटीबी अस्पताल जैसे प्रमुख अस्पतालों में विश्वस्तरीय कंपनियों के महत्वपूर्ण उपकरण इस्तेमाल में नहीं आ रहे हैं, जबकि इन पर बड़ी राशि खर्च की गई है।
कहां-कितने उपकरण बेकार
पीठ के मुताबिक कैंसर अस्पताल में 50-60 करोड़ रुपये के उपकरण बेकार पड़े हैं। जीटीबी अस्पताल में कोविड-19 के दौरान दान किए गए 400 वेंटिलेटर और 910 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं। अदालत को सौंपी गई रिपोर्ट के अनुसार, अस्पताल की ईसीजी मशीन भी काम नहीं कर रही है।
रिपोर्ट में उपकरणों के इस्तेमाल न होने के प्रमुख कारण तकनीकी जनशक्ति की कमी और एसेसरीज व मुख्य उपकरण उपलब्ध न होना बताए गए हैं।
पीठ ने सवाल उठाया कि इतने बड़े सार्वजनिक निवेश के बावजूद उपकरणों को उपयोग में लाने के लिए आवश्यक जनशक्ति जुटाने के क्या प्रयास किए गए। अदालत ने कहा कि बेकार पड़े उपकरणों की संख्या बेहद अधिक है और इस स्थिति का तत्काल समाधान जरूरी है।
17 अगस्त को बैठक का निर्देश
अदालत ने स्वास्थ्य सचिव को सभी संबंधित अस्पतालों के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट और सचिव (सेवाएं) के साथ बैठक करने का निर्देश दिया है। यह बैठक 17 अगस्त को सुबह 11:30 बजे स्वास्थ्य सचिव के कार्यालय में होगी। इसमें अस्पतालवार स्थिति की समीक्षा, आवश्यक जनशक्ति उपलब्ध कराने, जरूरत के अनुसार उपकरणों के पुनर्आवंटन और जरूरी एक्सेसरीज उपलब्ध कराने पर विचार किया जाएगा। इसके बाद विस्तृत रिपोर्ट अदालत में दाखिल की जाएगी।
अदालत 2017 में सरकारी अस्पतालों में क्रिटिकल केयर सुविधाओं की कथित कमी को लेकर स्वतः संज्ञान से शुरू किए गए मामले की सुनवाई कर रही है। मामले में अधिवक्ता अशोक अग्रवाल एमिकस क्यूरी हैं।
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